Posts

Showing posts from January, 2007

टुटने के बाद

Image
सोचा था उसने खुद को पुर्जो मे बांट डालेगा... अपनी कहानी अपने हाथो से फाड़ डालेगा... कहानी बनने के पहले हिं वो बट गया पुर्जो में... टुट गया मिट्टी का खिलौना अभी पकने में... बेइंतहा मोहब्बत थी उसे ज्ञिन्दगी से... लेकिन टुटने के बाद, नफरत सी हो गई है उसे, उन खिलौनो से... जो टुट जाते हैं बिच मझधार में.... ------श्वेताभ रंजन-----

सिमटते हुए देखा.....

Image
बादलो को हटते हुए देखा.. चांद को फिर ढकते हुए देखा... सुरमयी शाम की तरह.... ढलते हुए देखा, पायल की हल्की आहट कर.. उसे चलते हुए देखा, घर से निकला था अभी दुर कहां .... पास हीं उसे , गुजरते हुए देखा.... हर सांस पे उसको सिमटते हुए देखा..... ------------------------श्वेताभ रंजन---------------

तेरा चेहरा............

Image
आब वक्त एक समन्दर सा नही लगता.... जिन्दगी अब बवन्डर सा नही लगता......... बहुत नजदीक आ गये हो तुम मेरे............. फिर भी सासो मे उलझन सा नही लगता........ प्यार का हर शर्त जुदा सा नही लगता.... हर शख्स मुझे अब खुदा सा नही लगता.... कुछ दुर तुम्हारे साथ चला हु मै.... फिर भी कुछ थका - थका सा नही लगता लोग कहते है कि तु अब सबसे खफा नही लगता तेरा हमसफर तुझसे जुदा नही लगता सुबह और शाम तु मेरे ख्यलो मे है ऐसे कि अब तेरा चेहरा ही मुझए खुदा सा लगता - ---------------------------श्वेताभ रंजन---------------