प्रियतम बुलाना चाहता हूँ....


तुमको पहले बार कहते हुए डरता हूँ मैं....
हर बार तुम्हारा नाम, ख़ुद से कहता हूँ मैं.......
आज तोड़ना चाहता हूँ खामोशी की दीवारों को......
हाँ तुम्हे प्रियतम कह बुलाना चाहता हूँ मैं....

ख़ुद से हर बार कह कर चुप सा हो जाता हूँ मैं....
तुम्हारे साथ चलते चलते रुक सा जाता हूँ मैं....
आज पहले बार,... हाँ पहले बार...
तुम्हे प्रियतम कह बुलाना चाहता हूँ मैं......

अपने सिने में उठे इस शब्द को उतारना चाहता हूँ मैं...
बहुत बेचैनी है मेरे लबो पे ........
बहुत अक्षरों का मेल हो रहा है....
शब्द बन गए है, ख़ुद को अब रोकना नही चाहता हूँ मैं.....
आज पहले बार, हाँ पहले बार.....
प्रियतम तुम्हे....प्रियतम बुलाना चाहता हूँ मैं.......

...................श्वेताभ रंजन............


Comments

wonderful poem...
all credits to you bhaiya

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