सिमटते हुए देखा.....




बादलो को हटते हुए देखा..


चांद को फिर ढकते हुए देखा...


सुरमयी शाम की तरह....


ढलते हुए देखा,


पायल की हल्की आहट कर..


उसे चलते हुए देखा,


घर से निकला था अभी दुर कहां ....


पास हीं उसे , गुजरते हुए देखा....


हर सांस पे उसको सिमटते हुए देखा.....


------------------------श्वेताभ रंजन---------------

Comments

महसूस किया है हमने सिर्फ़ तेरे प्यार को सनम
अब दर्द की बातो को ना झेला ज़ायगा
बढ़ेगी जितनी बेताबियाँ इस इश्क़ में सनम
उतना ही इस दर्द मैं जलने का मज़ा आएगा

ranju

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